17 January 2020
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उपहार से अनाज मंडी तक, आग से दहली दिल्ली

उत्तरी दिल्ली के अनाज मंडी इलाके में लगी भीषण आग में 43 लोगों की मौत से एक बार फिर शासन-प्रशासन पर सवाल खड़ा हो गया है। इस तरह की घटना में हर बार रिहाइशी इलाकों में अवैध फैक्ट्रियां चलने, होटल, रेस्त्रां, सिनेमाघर आदि में आग से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम के अभाव की बातें सामने आती हैं। हर बार फायर ऑडिट की बात कही जाती है, नेता एक-दूसरे पर कीचड़ उछालते हैं, सरकारों, नगर निगमों और अधिकारियों पर दोष मढ़ा जाता है, लेकिन आग ठंडी पड़ते ही मुद्दा भी ठंडा पड़ जाता है। और ऐसा एक-दो साल से नहीं हो रहा है।

दिल्ली में अब तक की सबसे खौफनाक आग की घटना उपहार सिनेमा की है जो साल 1997 में सामने आई थी। तब से अब तक एक-दूसरे पर दोष मढ़ने के अलावा इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका जिससे इस तरह की भयावह घटना सामने नहीं आए। आइए दिल्ली में आग की बड़ी घटनाओं को याद करते हैं…

उपहार सिनेमा कांड
अनाज मंडी में आग की खबर से बरबस ही उपहार सिनेमा कांड की याद आ गई। 13 जून, 1997 को दक्षिण दिल्ली के उपहार सिनेमा में बॉर्डर फिल्म देखने पहुंचे बहुत से लोगों के जीवन का अंतिम दिन साबित हुआ था। दरअसल शो के दौरान सिनेमाघर के ट्रांसफॉर्मर कक्ष में आग लग गई जो तेजी से अन्य हिस्सों में फैल गई। आग की वजह से 59 लोगों की मौत हो गई थी जिनमें महिलाएं और बच्चे भी थे। घटना की जांच के दौरान पता चला था कि सिनेमाघर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे।

बवाना में 17 लोगों की मौत
राजधानी के बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में 21 जनवरी, 2018 को तीन फैक्ट्रियों में भीषण आग लग गई। आग से 17 लोगों की मौत हो गई है। मरने वालों में 8 महिलाएं थीं। इलाके में अवैध रूप से फैक्ट्रियां चल रही थीं। आग एक पटाखा फैक्ट्री के बेसमेंट और फर्स्ट फ्लोर पर लगी थी। बवाना इंडस्ट्रियल एरिया कनॉट प्लेस से महज 35 किलोमीटर की दूरी पर है।

होटल अर्पित में 17 लोगों की मौत
12 फरवरी, 2019 को करोल बाग के होटल अर्पित में आग ने 17 लोगों की जान ले ली। सुबह एक छोटी-सी चिनगारी ने भयानक आग का रूप ले लिया था। आग लगने के वक्त होटल में करीब 53 लोग थे। होटल के अगल-अलग कमरों में सोए लोगों की सुबह 3 बजे के आसपास अचानक दम घुटने लगा। गर्मी बढ़ गई। दरवाजा खोला तो सब धुआं-धुआं था। कई लोग जान बचाने के लिए ऊपर से ही कूदने लगे।

तब दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा था कि होटलों का कवरेज एरिया बढ़ा लिया जाता है और छत पर रेस्त्रां बना दिया जाता है। अर्पित होटल में भी यही देखने को मिला। करोल बाग के इस एरिया में चार मंजिल से ज्यादा नहीं बनाई जा सकती है, लेकिन यह होटल छह मंजिला बनाया गया था। पांच पक्की मंजिल और एक टेंपरेरी मंजिल बनाई गई थी। छत को पूरी तरह से फाइबर शीट से कवर किया गया था। फाइबर शीट होने के कारण होटल में तेजी से आग फैली। दीवार पर वुडेन वर्क था, फ्लोर पर कारपेट बिछे थे।

घटना के बाद फायर डिपार्टमेंट ने करोल बाग के 45 होटलों की जांच की और इनमें से 30 होटल फायर सेफ्टी नियमों में फेल हो गए। दिल्ली सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए इन 30 होटलों की फायर एनओसी कैंसल कर दी थी।

नरेला की फैक्ट्री में आग
16 नवंबर, 2019 की रात बाहरी दिल्ली के नरेला इंडस्ट्रियल एरिया में एक फैक्ट्री में भयंकर आग लग गई। इस हादसे में एक शख्स की मौत हो गई जबकि लाखों रुपये का सामान जलकर खाक हो गया। फैक्ट्री में जूते-चप्पल बनाए जाते थे। इसलिए यहां बड़ी मात्रा में रबर और जूते-चप्पल बनाने के काम आने वाले केमिकल्स भी रखे हुए थे जिनकी वजह से आग तेजी से भड़क गई थी।

बवाना इंडस्ट्रियल में एरिया में नियमों का खुला उल्लंघन
बाहरी दिल्ली के बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में प्लास्टिक फैक्ट्री में बीती रात अचानक आग लग गई। रात लगभग 3 बजे लगी आग पर फायर ब्रिगेड सुबह 8 बजे के आसपास काबू पा सकी। शुक्र इस बात का है कि उस वक्त फैक्ट्री में कोई कर्मचारी काम पर नहीं था। इसलिए किसी के जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। आग बेसमेंट और ऊपर की दोनों मंजिलों में लगी थी। फैक्ट्री 3 ओर से दूसरी फैक्ट्रियों की दीवारों से घिरी हुई थी। इसलिए आग को काबू करने के लिए हाइड्रो क्रेन बुलाई गई। दमकल की 22 गाड़ियों ने मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया है। तब बताया गया था कि बिल्डिंग में लाखों का सामान और मशीनरी जलकर राख हो गई। दो मंजिल की बिल्डिंग भी पूरी तरह से जर्जर हो गई। किसी भी वक्त बिल्डिंग का लिंटर गिर सकता है।

इसी साल 27 अगस्त को बवाना के ही सेक्टर-2 ए ब्लॉक स्थित नमकीन-चिप्स बनाने की फैक्ट्री में फैक्ट्री के ग्राउंड फ्लोर पर अचानक आग लग गई थी। तीन मंजिला इस फैक्ट्री में आग की सूचना मिलते ही वर्कर्स फैक्ट्री से बाहर निकल गए। सूचना पर पहुंची दमकल की चार गाड़ियों ने आग पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका। चार दमकल की गाड़ियों में पानी खत्म होने के करीब 20 मिनट बाद अन्य दमकल की गाड़ी आई। जबतक आग तीसरी मंजिल तक पहुंच चुकी थी। देखते ही देखते लाखों का सामान खाक हो गया था। दमकल की अन्य गाड़ी आने के बाद आग पर काबू पाया जा सका था।

इसी वर्ष 23 मार्च को भी बवाना इलाके में एक प्लास्टिक फैक्ट्री में भी आग लग गई थी। फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियों ने आग पर काबू पाया, इसमें कोई हताहत नहीं हुआ।

होती रहती है आग लगने की घटना
बीते 19 नवंबर को भी बाहरी दिल्ली के बकौली औद्योगिक क्षेत्र में लगी आग की सूचना पाकर दमकल की 15 गाड़ियां मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया था।

27 अगस्त को ही आईटीओ के पास विकास भवन की दूसरी मंजिल पर आग लग गई थी। आग दिल्ली महिला आयोग के कार्यालय में लगी थी। आग कॉन्फ्रेंस हॉल में लगी जहां 22 से 25 कर्मचारी मौजूद थे। एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

23 मार्च, 2019 को भलस्वा डेरी थाने के मालखाने में आग लग जाने से यहां जब्ती की रखीं 15 कार जलकर खाक हो गईं। जिस वक्त आग लगी, उस वक्त मालखाने की रखवाली के लिए कोई तैनात नहीं था। फायर ब्रिगेड की पांच गाड़ियों ने आग पर काबू पाया था। लोगों का कहना था कि अगर कोई पुलिसकर्मी यहां तैनात होता तो इस हादसे को समय रहते रोका जा सकता था।

खतरे की जद में कई इलाके
दिल्ली में कई ऐसे इलाके हैं जहां एक चिनगारी भी भड़की तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है। गांधी नगर में कपड़े की बड़ी मंडी है। वहीं, सीलमपुर, शाहदरा, जाफराबाद, नरेला, लक्ष्मी नगर जैसे इलाकों की हालत काफी गंभीर है। पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में दर्जनों कोचिंग सेंटर्स चलते हैं जहां आग से सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है। गलियां बेहद संकरी हैं। यहां कभी किसी कारण से एक चिनगारी भी भड़की तो बड़ा हादसा होने का खतरा है। यह जानते हुए भी शासन-प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। स्वाभाविक है कि इस इलाके से जब तक कोई खौफनाक खबर नहीं आएगी, प्रशासन की नींद नहीं खुलने वाली।

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