18 January 2020
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तीन दशकों में पहली बार 50% केसों में साबित हुआ जुर्म

भारत की न्याय व्यवस्था में केस दर्ज होने से लेकर आरोप साबित होने तक का सफर बहुत लंबा रहा है। ज्यादातर मामले अदालतों में साबित ही नहीं हुए। लेकिन, अब तस्वीर बदली हुई लगती है। बीते तीन दशकों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब आईपीसी के तहत दर्ज 50 फीसदी मामलों में आरोपी दोषी साबित हुए हैं। इससे पहले 1988 में ऐसा हुआ था, जब 50 फीसदी अपराधियों के खिलाफ आरोप साबित हुए थे।

इसके बाद फिर यह दर घटती ही रही और 1998 में महज 37.4 पर्सेंट मामलों में ही आरोप साबित हो सके। हालांकि इसके बाद इसमें कुछ इजाफा हुआ और लगातार कई सालों तक यह दर 40 से 42 फीसदी के करीब बनी रही। हालांकि 2016 में यह बढ़कर 46.8 पर्सेंट और 2017 में 48.8 पर्सेंट हो गया।

रेप और मर्डर के मामलों में अब भी कम साबित हो रहे जुर्म
आरोप साबित होने की संख्या बढ़ने के बाद भी रेप, हत्या, हत्या के प्रयास, रेप के प्रयास और दलितों के उत्पीड़न जैसे गंभीर मामलों में यह आंकड़ा अब भी कम है।

27 फीसदी रेप केस ही अंजाम तक पहुंच सके
2018 में रेप के सिर्फ 27 फीसदी मामलों में ही आरोप साबित हो सके। मर्डर के मामलों में भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं रही। 1988 में 43 फीसदी हत्या के केस में आरोप साबित हुए, जबकि 2018 में 41.4 पर्सेंट मामलों में ही ऐसा हुआ।

रेप के मामले अधिक दर्ज होना भी है एक वजह
यही नहीं रेप के मामलों में भी आरोपियों के दोषी साबित होने का औसत काफी नीचे आ गया। 1988 में 36.5 पर्सेंट मामलों में दोष सिद्ध हुआ था, जबकि 2018 में यह आंकड़ा 27.2 पर्सेंट पर ही आ ठहरा। हालांकि इसे रेप के मामलों के दर्ज होने की संख्या में इजाफे के तौर पर भी देखा जा सकता है। 30 साल पहले के मुकाबले अब रेप के मामले अधिक संख्या में पुलिस तक जाने लगे हैं।

रेप, मर्डर जैसे जघन्य अपराध घटे, चोरियां बढ़ गईं
यदि 2017 से तुलना की जाए तो साल 2018 में देश में अपराधों की दर कुछ कम रही। 2017 में प्रति लाख आबादी पर 237.7 मामले सामने आए थे, जबकि 2018 में यह आंकड़ा 236.7 पर आ गया। 2018 में मर्डर, रेप, दहेज उत्पीड़न में हत्या और हत्या के प्रयास जैसे अपराधों में कमी दर्ज की गई है। हालांकि यौन उत्पीड़न और चोरी दैसे मामलों में इजाफा हुआ है।

पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा तेजाब कांड, यूपी दूसरे नंबर पर
सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में तेजाब की सेल पर रोक लगा दी थी, इसके बाद भी तेजाब डालने की घटनाएं कम नहीं हुई हैं। इसी साल राष्ट्रीय महिला आयोग ने तेजाब की बिक्री को लेकर नियमों को कड़ा करने का आदेश दिया था। खासतौर पर पश्चिम बंगाल में तेजाब कांड सबसे ज्यादा दर्ज किए गए। इसके बाद उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और गुजरात का नंबर रहा।

अपराधों से बड़े कातिल हैं रोड हादसे
अपराधों से ज्यादा खतरनाक रोड हादसे भी हैं, जिनमें हर साल लाखों लोग जान गंवा देते हैं। आंकड़ों के मुताबिक खासतौर पर जनवरी और मई के महीनों में रोड ऐक्सिडेंट्स की संख्या बढ़ जाती है। इसकी वजह शायद जनवरी में दृश्यता कम होना और मई में ट्रैफिक का बढ़ना भी हो सकता है।

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