12 November 2019
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प्रदूषण के लिए मुख्य सचिव तक का जिम्मा: SC

नई दिल्ली

दिल्ली-एनसीआर के गैस चैंबर में तब्दील होने पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकारों को बेहद कड़ी फटकार लगाई है। देश का सर्वोच्च अदालत ने इसे जीने के अधिकार का उल्लंघन बताया है। अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार से पूछा कि आखिर आप हवा को बेहतर करने के लिए क्या कर रहे हैं। इसके अलावा कोर्ट ने हरियाणा और पंजाब सरकार से भी पूछा कि आप पराली जलाने में कमी लाने के लिए क्या कर रहे हैं। इस मामले पर अब अगली सुनवाई बुधवार को होगी।

इस तरह से नहीं जिया जा सकता: SC
कोर्ट ने कहा, ‘इस तरीके से नहीं जिया जा सकता। केंद्र सरकार, राज्य सरकार को कुछ करना चाहिए। इस तरह से नहीं चल सकता। यह बहुत ज्यादा है। शहर में कोई कमरा, कोई घर सेफ नहीं है। हम इस पलूशन के चलते जिंदगी के कीमती साल गंवा रहे हैं।’ सुप्रीम कोर्ट ने इसके अलावा पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भी इस मामले को लेकर अदालत के सामने पेश होने को कहा है। साथ ही दिल्ली और केंद्र सरकार से एक्सपर्ट की सलाह लेकर तत्काल जरूरी कदम उठाने को कहा है।

कूड़ा जलाने, डस्ट उड़ाने पर फाइन का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि दिल्ली में अगर कोई शख्स निर्माण या पुरानी इमारतों को तोड़ने पर लगे बैन का उल्लंघन करता है तो उस पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाए। अगर कोई कूड़ा जलाता है तो उस पर 5000 रुपये फाइल लगे। कोर्ट ने नगर निकायों को निर्देश दिया कि वे खुले में कूड़ा फेंकने को रोकें।

दिल्ली में ऑड-ईवन पर उठाए सवाल
कोर्ट ने दिल्ली में ऑड-ईवन स्कीम के औचित्य पर भी सवाल उठाया। कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा कि इसके पीछे लॉजिक क्या है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया है कि वह शुक्रवार तक डेटा और रेकॉर्ड्स जमा कर यह साबित करे कि ऑड-ईवन से प्रदूषण कम हुआ है

दुनिया के किसी सभ्य देश में ऐसा नहीं होता
शीर्ष कोर्ट ने माना कि दिल्ली में कोई भी जगह सुरक्षित नहीं बची है। चाहे वह किसी का घर ही क्यों न हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शहर का दम घुट रहा है लेकिन दिल्ली सरकार और केंद्र आरोप-प्रत्यारोप में उलझे हैं। सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हर साल घुटती जा रही है, लेकिन हम कुछ नहीं कर पा रहे। ऐसा हर साल 10-15 दिनों के लिए होने लगा है। ऐसा किसी सभ्य देश में नहीं होता। जीने का हक सबसे जरूरी है।

SC ने कहा, दूसरों की जान नहीं ले सकते किसान
यही नहीं पंजाब और हरियाणा के किसानों के पराली जलाने पर भी कड़ी टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसान अपनी आजीविका के लिए दूसरों की जान नहीं ले सकते। यदि वे ऐसा करते रहे तो हमें उनसे कोई सहानुभूति नहीं होगी। जस्टिस अरुण मिश्रा ने पर्यारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव से पूछा, ‘कितने इलाकों में पराली जलाई जा रही है। यह बहुत बड़ा इलाका है।’

पर्यावरण मंत्रालय से पूछा, पराली पर क्या किया?
जस्टिस मिश्रा ने पूछा कि पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए? पर्यावरण मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने कहा कि सभी स्थानों पर निर्माण कार्यों को रोकने की जरूरत है। सभी राज्यों के चीफ सेक्रटरीज को नोटिस जारी किया गया है।

‘इस तरह से हम नहीं जी पाएंगे’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह से हम नहीं जी पाएंगे। केंद्र और राज्य सरकार को कुछ करना होगा। ऐसा नहीं चल सकता। यह बहुत ज्यादा हो चुका है। इस शहर की कोई जगह सुरक्षित नहीं है। यहां तक कि घर भी सेफ नहीं। इसकी वजह से हम अपने जीवन के कीमती साल खो रहे हैं।

केंद्र से आधे घंटे में मांगा समाधान
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार ने आधे घंटे के अंदर आईआईटी दिल्ली से किसी पर्यावरण एक्सपर्ट और मंत्रालय से किसी को बुलाने को कहा। केंद्र को कहा है कि वह उनसे आधे घंटे के अंदर समाधान पूछे, जिससे इस स्थिति से निपटा जा सके।

‘पराली जलना रोके पंजाब-हरियाणा सरकार’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हालात बहुत खराब हैं। केंद्र और राज्य सरकार क्या करने वाली हैं? पलूशन को कम करने के लिए आप क्या करेंगे? सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा को पराली कम जलाने को भी कहा।’

‘पराली जले तो ग्राम प्रधान भी हों जिम्मेदार’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पराली जलाने पर तुरंत रोक लगनी चाहिए जिसके लिए राज्य सरकारों को कदम उठाने होंगे। प्रशासन को सख्त कदम उठाने होगें और अधिकारियों के साथ साथ ग्राम प्रधान तक की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

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