17 February 2020
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गगनयान: इसरो ने बनाया ‘व्‍योमित्र’, ‘इंसानी रोबॉट’ देगा र‍िपोर्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी गगनयान परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए इसरो ने कमर कस ली है। इस मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान के लिए 2022 के शुरुआती महीने का लक्ष्य निर्धारित है। गगनयान की उड़ान से ठीक पहले इसरो ‘व्‍योमम‍ित्र’ को अंतरिक्ष में भेजेगा और वहां पर मानव शरीर के क्रियाकलापों का अध्‍ययन करेगा। यह ‘हाफ ह्यूमनॉइड’ (इंसानी) रोबॉट अंतरिक्ष से इसरो को अपनी र‍िपोर्ट भेजेगा। इसरो ने बुधवार को व्‍योमित्र को दुनिया के सामने पेश किया और इसकी खूबियों के बारे में बताया।

इसरो के वैज्ञानिक सैम दयाल ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘व्‍योमम‍ित्र अंतरिक्ष में एक मानव शरीर के क्रियाकलापों का अध्‍ययन करेगा और हमारे पास र‍िपोर्ट भेजेगा। हम इसे एक परीक्षण के रूप में अंजाम दे रहे हैं।’ बताया जा रहा है कि ‘व्‍योमम‍ित्र’ अपने आप में बेहद खास रोबॉट है। यह बात कर सकता है और मानव को पहचान सकता है। यह रोबॉट अंतरिक्षयात्रियों के द्वारा किए जाने वाले किए जाने वाले क्रियाकलाप की नकल कर सकता है।’

सवालों का जवाब दे सकता है व्‍योमम‍ित्र
व्‍योमम‍ित्र बातचीत कर सकता है और लोगों के सवालों का जवाब दे सकता है। इस रोबॉट को इसरो ने विकसित किया है। बुधवार को व्‍योमम‍ित्र को बेंगलुरु में पेश किया गया। इस दौरान व्‍योमम‍ित्र ने यह कहकर लोगों का अभिवादन किया, ‘हाय, मैं हाफ ह्यूमनॉइड (इंसानी) का पहला प्रोटोटाइप हूं।’ दयाल ने कहा कि इस रोबॉट को हाफ ह्यूमनॉइड इसलिए कहा जा रहा है क्‍योंकि इसके पैर नहीं हैं।

दयाल ने कहा कि यह रोबॉट केवल आगे और साइड में झुक सकता है। यह अंतरिक्ष में कुछ परिक्षण करेगा और इसरो के कमांड सेंटर से संपर्क में रहेगा। उल्‍लेखनीय है कि पीएम मोदी के ऐलान के मुताबिक इसरो 2022 की समयसीमा के अंदर भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन पर ‘गगनयान’ को भेजने की तैयारी में जोर-शोर से जुट गया है। इस अभियान का मकसद भारतीयों (गगनयात्रियों) को अंतरिक्ष यात्रा पर भेजकर उन्हें सुरक्षित वापस लाना है।

अंतरिक्ष यात्रा के चार कैंडिडेट्स का चयन
इसरो चेयरमैन के. सिवन ने कहा है कि अंतरिक्ष यात्रा के कुल 12 में से पहले चार कैंडिडेट्स का चयन हो चुका है और वे रूस में इस महीने के आखिर में ट्रेनिंग शुरू करेंगे। इन कैंडिडेट्स की पहचान गुप्त रखी जा रही है। हां, इतना जरूर पता है कि ये सभी भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट्स हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम नवंबर महीने से शुरू होगा और 15 महीने तक चलेगा। इस मिशन पर 10 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे।

मिशन के निर्धारित लक्ष्यों के मुताबिक, भारत अपने कम-से-कम तीन अंतरिक्ष यात्रियों को 5 से 7 दिन के लिए अंतरिक्ष में भेजेगा जहां वे विभिन्न प्रकार के माइक्रो-ग्रैविटी टेस्ट को अंजाम देंगे। रूस स्पेश मिशन में भारत को तीन पहलुओं से मदद कर रहा है। गगनयान के लिए नैशनल अडवाइजरी कमिटी बनाई गई है।

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