17 February 2020
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दिल्ली में चौंकाने का दावा क्यों कर रहे हैं शाह

चुनावी चाणक्य की छवि बना चुके केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के दिग्गज नेता अमित शाह ने चुनाव प्रचार के आखिरी दिन दावा किया कि दिल्ली में बीजेपी 70 में से 45 सीटें जीतकर सरकार बनाएगी। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दिल्ली में चुनावी हवा का रुख बीजेपी की तरफ हो चुका है और कुछ नेताओं के चेहरे उतर चुके हैं। आखिर देश के दो सियासी सूरमा इस तरह के दावे क्यों कर रहे हैं? आखिर जनता के बीच आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की कमोबेश काम करने वाली छवि के बावजूद मोदी-शाह को ऐसा क्यों लग रहा है कि जनता केजरीवाल को दोबरा मौका नहीं देने वाली?

रैलियों से रुख बदलने की आस
दरअसल, इस दावे के पीछे खुद मोदी-शाह के साथ-साथ पार्टी के कई दिग्गज नेताओं की रैलियों में उमड़ रही भीड़, पार्टी के आंतिरक सर्वे में कथित तौर पर सामने आया जनता का बदला हुआ मिजाज और कुछ ओपिनियन पोल्स के नतीजे हैं। बीजेपी के नेताओं का मानना है कि गृह मंत्री अमित शाह और उसके बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैलियों ने जहां दिल्ली के चुनावी माहौल को बदलने का काम किया, वहीं अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों के बाद माहौल बीजेपी के पक्ष में बनता दिखने लगा है। इस दावे के पीछे पार्टी का एक इंटरनल सर्वे है जो सोमवार को ईस्ट दिल्ली में हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के ठीक बाद दिल्ली के सभी विधानसभा क्षेत्रों में करवाया गया था। इस सर्वे के नतीजों के आधार पर कहा जा रहा है कि शाहीन बाग, सर्जिकल स्ट्राइक, बाटला हाउस जैसे मुद्दों पर मोदी ने जिस तरह खुलकर अपनी बात सामने रखी है, उसका लोगों पर काफी असर पड़ता दिख रहा है।

आंतरिक सर्वे ने बढ़ाया उत्साह
बीजेपी के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मोदी की रैली से पहले जितने भी सर्वे कराए गए थे, उनमें बीजेपी दिल्ली में आम आदमी पार्टी को टक्कर देती तो दिख रही थी, लेकिन नतीजे आम आदमी पार्टी के ही पक्ष में झुकते दिख रहे थे। हालांकि, पहले योगी आदित्यनाथ और फिर प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों के बाद से मुकाबला कांटे का हो गया है और नतीजे अब बीजेपी के पक्ष में झुकते नजर आने लगे हैं। सबसे खास बात यह है कि इस सर्वे में कई सीटों पर कांग्रेस बाजी मारती नजर आ रही है।

सूत्रों ने बताया कि सोमवार को देर शाम कराए गए सर्वे में बीजेपी को जहां 27 सीटें मिलती दिख रही हैं, वहीं आम आदमी पार्टी को 26 और कांग्रेस को 8 से 9 सीटें मिलती दिख रही हैं जबकि बाकी कि सीटों पर बेहद कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है और नतीजे किसी के भी पक्ष में जा सकते हैं। पार्टी नेताओं के मुताबिक, यह सर्वे सोमवार की रैली के बाद है जबकि मोदी ने मंगलवार की शाम को भी वेस्ट दिल्ली के द्वारका इलाके में भी एक और बड़ी चुनावी रैली को संबोधित किया है। ऐसे में उस रैली के बाद माहौल के और बदलने की संभावना जताई जा रही है। खासतौर से वेस्ट दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में बीजेपी की स्थिति और सुधरने की उम्मीद है।

गहन प्रचार अभियान के रंग लाने की उम्मीद
पार्टी को टॉप लीडरशिप ने प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। शाह ने अकेले दिल्ली की 50 विधानसभाएं नाप डालीं, जो अपने आप में एक नया रेकॉर्ड है। बीजेपी के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अमित शाह ने 23 जनवरी से दिल्ली विधानसभा चुनावों के प्रचार शुरू किया था। 6 फरवरी की शाम को प्रचार खत्म होने तक वह दिल्ली की 41 विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाएं और 12 इलाकों में रोड शो कर चुके थे। वहीं, पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा ने भी दिल्ली में 29 जनसभाओं के साथ-साथ 15 रोड शो किए। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी प्रचार के दौरान काफी सुर्खियां बंटोरीं।

रैलियों में उमड़ी भीड़ पर भरोसा
शाह ने रैलियों में उमड़े जैनसैलाब की कई तस्वीरें ट्वीट कीं। मादीपुर और सीमापुरी विधानसभा क्षेत्रों में अपने रोडशो के फोटो शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि बड़ी तादाद में उमड़ते लोग इस बात के सबूत हैं कि बीजेपी दिल्ली में कितना लोकप्रिय है। शाह ने गुरुवार को कहा, ‘दिल्ली के लोगों से संपर्क हुआ तो यह स्पष्ट उभर कर आया कि वो झूठे वादों, तुष्टीकरण की राजनीति और अराजकता से त्रस्त हैं। वो अब विकास चाहते हैं। दिल्ली में बीजेपी को मिल रहे समर्थन को देखते हुए स्पष्ट है कि 11 फरवरी को बीजेपी 45 से ज्यादा सीटें जीतकर दिल्ली में सरकार बनाने जा रही है।’

सर्वे के नतीजों से बल
एबीपी न्यूज – सी वोटर के ओपिनियन पोल के नतीजे भी बताते हैं कि बेजेपी के शीर्ष नेतृत्व का पार्टी पर सकारात्मक असर हुआ है। सर्वे के मुताबिक, 61 प्रतिशत लोगों ने माना कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों से बीजेपी को फायदा होने वाला है। जब लोगों से पूछा गया कि शाह की जनसभाओं से हवा का रुख बीजेपी की तरफ होगा तो 53 फीसदी ने हां में जवाब दिया जबकि 29 फीसदी लोगों को ऐसा होता नहीं लग रहा है। वहीं, 11 प्रतिशत लोगों ने कहा कि कहना मुश्किल है। इसी सर्वे में राय देने वाले 62 प्रतिशत लोगों ने कहा कि शाहीन बाग का धरना गलत है। वहीं, 83 प्रतिशत लोगों का मानना है कि शाहीन बाग का धरना सियासी मुद्दा बन चुका है। 39 प्रतिशत लोगों ने यह भी माना कि शाहीन बाग के मुद्दे से चुनाव में बीजेपी को फायदा होगा। हालांकि, सर्वे में यह भी कहा गया है कि सरकार में फिर आप की ही वापसी होगी।

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