18 January 2020
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योगी का बड़ा फैसला, नोएडा और लखनऊ में अब पुलिस कमिश्नर

लखनऊ और नोएडा में कमिश्नरेट प्रणाली लागू किए जाने पर सोमवार को कैबिनेट ने लगा दी है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में यूपी कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दे गई। बता दें कि 15 राज्यों के 71 शहरों में कमिश्नरेट प्रणाली पहले से लागू है। यूपी में योगी के सत्ता संभालने के बाद इस सिस्टम के लिए कवायद शुरू तो हुई थी, लेकिन ब्यूरोक्रेसी के दबाव में बात अंजाम तक नहीं पहुंच पाई। अब लखनऊ और नोएडा से इसकी शुरुआत हुई है।

लखनऊ में असीम अरुण को मिल सकता है जिम्मा
लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नर के पद पर एडीजी स्तर के अफसर की तैनाती पर मुहर लग गई है। ऐसे में अब अटकलें हैं कि लखनऊ में एडीजी असीम अरुण और नोएडा में आलोक सिंह पहले कमिश्नर हो सकते हैं। लखनऊ के लिए आशुतोष पाण्डेय, हाल ही में एडीजी के पद पर प्रमोट हुए जेएन सिंह और एडीजी सुजीत पाण्डेय का नाम भी चर्चा में है। हालांकि अंतिम फैसला सीएम योगी आदित्यनाथ के स्तर से लिया जाएगा।

उधर, नोएडा और लखनऊ में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम में पुलिस के अधिकार को लेकर बहस शुरू हो गई है। नए सिस्टम से शहरों में कानून व्यवस्था दुरुस्त होने के दावे से रिटायर्ड आईएएस अधिकारी इससे इत्तेफाक नहीं रखते। उनका तर्क है कि नए सिस्टम से आम लोगों का जो संवाद डीएम के माध्यम से प्रशासन से होता है, वह नहीं हो सकेगा। रिटायर्ड अफसरों के मुताबिक, डीएम-एसएसपी का सिस्टम सबसे अच्छा है।

ऐसे में नए सिस्टम का कोई औचित्य नहीं है। वहीं, राजस्व और उसकी वसूली से जुड़े अधिकार पुलिस कमिश्नर को न दिए जाने की चर्चा के बीच पूर्व पुलिस प्रमुखों का कहना है कि सिर्फ नाम के लिए कमिश्नर बैठाए जाने से कुछ नहीं होगा। उनके मुताबिक, पूरे अधिकार मिलें, तभी नया सिस्टम असरदार साबित होगा

यूपी के पूर्व मुख्य सचिव योगेंद्र नारायण के मुताबिक, अगर पुलिस के स्तर से कोई गड़बड़ी होती है तो डीएम से संवाद किया जाता है। मगर नई व्यवस्था के लागू होने से यह संवाद खत्म हो जाएगा। मौजूदा व्यवस्था ज्यादा बेहतर है। जिन शहरों में कमिश्नर सिस्टम लागू है, वहां इसके अच्छे परिणाम नहीं हैं। दिल्ली इसका हालिया उदाहरण है। वहीं, पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने कहा कि डीएम-एसएसपी की व्यवस्था में चेक ऐंड बैलेंस होता है। अगर पुलिस कोई गड़बड़ी करती है तो इसकी शिकायत डीएम से होती है। वर्तमान व्यवस्था में कोई कमी नहीं है। क्राइम कंट्रोल के मामले में डीएम का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है।

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