29 March 2020
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भारत की नाक के नीचे चीन का नौसैनिक अड्डा , बढ़ेगी टेंशन

हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से बेहद अहम भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह से मात्र 1000 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कंबोडिया का कोह कोंग बीचसाइड रेजॉर्ट दुनिया की नजर में छुट्टियां मनाने के लिए बेहतरीन जगह है। कोह कांग प्रांत में स्थित इस रेजॉर्ट के पास दारा सकोर अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डा भी है लेकिन हकीकत में यह हिंद महासागर में चीन की बढ़ती पहुंच का एक और उदाहरण है। इस हवाई अड्डे के आसपास भारत का धु‍र विरोधी चीन अरबों डॉलर खर्च करके विशाल नौसैनिक अड्डा बना रहा है जहां जंगी नौसैनिक जहाज, फाइटर जेट और सबमरीन तैनात की जा सकेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक नेवी और एयरफोर्स के लिए बनाए जा रहे इस ठिकाने से चीन की हिंद महासागर में पहुंच और आसान हो जाएगी।

चीनी अड्डे के लिए खत्‍म किया नैशनल पार्क
आस्‍ट्रेलियाई समाचार वेबसाइट न्‍यूज डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक इस नौसेना और एयरफोर्स के लिए बनाए जा रहे चीनी सैन्‍य अड्डे को बनाने के लिए 45 हेक्‍टेयर के नैशनल पार्क को खत्‍म कर दिया गया है। इसके अलावा समुद्र के अंदर सफाई की गई है और गहराई बढ़ाई गई है ताकि बड़े जंगी जहाज आसानी से आ जा सकें। मजेदार बात यह है कि कोह कोंग बीचसाइड रेजॉर्ट में कई कैसीनो बनाए गए हैं लेकिन वहां पर कोई पर्यटक नहीं आता है। ताजा सैटलाइट तस्‍वीरों के मुताबिक यहां पर 3.8 अरब डॉलर की मदद से किया जा रहा पर्यटन का विकास रोक दिया गया है लेकिन विशाल हवाई पट्टी का निर्माण जारी है। बताया जा रहा है कि इस साल के आखिर तक यह सैन्‍य अड्डा बनकर तैयार हो सकता है।

संदेह में घिरी कंबोडियाई हवाई पट्टी
दारा सकोर अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डे पर बनी 3400 लंबी हवाई पट्टी दुनियाभर के विश्‍लेषकों के संदेह के घेरे में आ गई है। इस हवाई अड्डे पर विमानों को घुमाने के लिए बनाई गई जगह इतनी छोटी है कि उस पर केवल सैन्‍य विमान ही घूम सकते हैं। यह हवाई अड्डा सबसे बड़े सिविल एयरक्राफ्ट की जरूरत से ज्‍यादा जगह यहां पर है। मजेदार बात यह है कि इस हवाई अड्डे के पास बहुत कम कंबोडियाई नागरिक रहते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने इस एयरपोर्ट के विकास का काम कैसीनो के विकास के नाम पर शुरू किया था। बता दें कि कंबोडिया ने 99 साल की लीज पर यह जमीन चीनी कंपनी को दे दी है।

हिंद महासागर में बढ़ जाएगी चीन की पहुंच
सैन्‍य विशेषज्ञों के मुताबिक चीन अपने इस सैन्‍य अड्डे की मदद से हिंद महासागर पर अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहता है। इस क्षेत्र में समुद्री आधिपत्‍य को लेकर चीन का इंडोनेशिया, वियतनाम, फिलीपीन्‍स समेत कई देशों के साथ विवाद चल रहा है। हाल ही में चीन ने इंडोनेशिया के एक्‍सक्‍लूसिव समुद्री सीमा में अपने मछली पकड़ने वाले दस्‍ते को भेज दिया था। इसके विरोध में इंडोनेशिया ने इस इलाके में लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। कंबोडिया में बन रहे सैन्‍य ठिकाने के पूरा हो जाने के बाद चीन अपनी दादागिरी को और बढ़ाएगा। चीन ऐसा पहले साउथ चाइना सी में कर चुका है।

दक्षिण पूर्व एशिया में बदल जाएगा खेल
चीन का दावा है कि पूरा दक्षिण चीन सागर उसका है। अमेरिकी अखबार न्‍यूयार्क टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक दारा सकोर हवाई अड्डे से चीन की नौसेना और एयरफोर्स दोनों ही आसानी से वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया के समुद्री इलाके में घुस सकेंगे। यही नहीं दुनिया के सबसे व्‍यस्‍ततम समुद्री व्‍यापार मार्गों में से एक मलक्‍का स्‍ट्रेट पर चीन की पकड़ मजबूत हो जाएगी। इस सैन्‍य अड्डे से चीन अपनी हवाई क्षमता का पूरे इलाके में प्रदर्शन कर सकेगा और दक्षिण पूर्व एशिया का पूरा राजनीतिक खेल बदल सकता है। चीन ने कंबोडिया के नौसैनिक अड्डों तक अपनी पहुंच के लिए 30 साल के एक समझौते पर हस्‍ताक्षर किया है।

भारत के लिए गंभीर खतरे की घंटी
विशेषज्ञों के मुताबिक चीन का यह सैन्‍य न केवल दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के लिए बल्कि भारत के लिए गंभीर खतरा है। चीन थाइलैंड के अंदर से एक नहर बनाने की योजना पर काम कर रहा है जिससे दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर के बीच सीधे संपर्क हो जाएगा। इससे चीन को मलक्‍का स्‍ट्रेट से नहीं जाना पड़ेगा जहां अमेरिका के सहयोगी देशों का आधिपत्‍य है। दारा सकोर नौसैनिक अड्डा और थाइलैंड में बनाई जा रही नहर भारत के लिए गंभीर खतरे का संकेत है। चीन की नौसेना के जंगी जहाज दारा सकोर नौसैनिक अड्डे से आसानी से अंडमान सागर में घुस सकेंगे। यही नहीं चीन के बमवर्षक विमान कंबोडिया से उड़ान भरकर अंडमान निकोबार द्वीप समूह में स्थित भारतीय सैन्‍य ठिकाने पर हमला कर सकने में सक्षम हो जाएंगे। इसी ख‍तरे को देखते हुए भारत लगातार अंडमान सागर में अपनी सैन्‍य उपस्थिति बढ़ा रहा है। हाल ही में इंडियन नेवी ने अंडमान में अपने समुद्री क्षेत्र में घुसने पर चीन के जहाज को भगाया था।

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