12 May 2021
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‘हिंदुस्तान के दिल’ में सिसकन, आंसू, मौत, और सामने किसान

अब इसमें आश्चर्य क्या करना। क्या ही रोना और क्या ही सियासतदानों से कोई उम्मीद करना। ये हिंदुस्तान का दिल है ज़नाब, जहां पर मासूम बच्चे, मुफलिसी के मारे लोगों पर ख़ाकी का डंडा अभिशाप पर बरस रहा है। ये वही प्रदेश है जहां पर कुछ ही महीने पहले सत्ता की खींचतान मची थी और बाद में सत्ता हासिल की उस पार्टी ने जो खुद को किसानों का मसीहा कहते है। इस प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री को उनके प्रदेश की जनता ‘मामा’ ‘मामा’ कहकर पुकारती है। इतना ही नहीं दोनों के बीच इतना घनिष्ठ कलयुगी रिश्ता है कि खुद मामा भी अपने संबोधन में मेरे प्यारे भांजे और भांजियों और मेरी बहनों कहकर पुकारते हैं। उन्हीं के आला ऑफिसर उनपर लाठियां बरसाते हैं। बेरहमी से मारते हैं। लात, घूंसे, लाठी जो मिला सब चलने दो।

दर्द नहीं अफसोस के आंसू
ऐसी तस्वीरें देखकर दुख नहीं अफसोस के आंसू निकलते हैं। आजादी के इतने बरस बीत जाने के बाद भी हमारे मुल्क के किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं बल्कि लाठियां मिलती हैं। मौत मिलती है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने भले ही जय जवान, जय किसान का नारा दिया हो लेकिन किसानों की जय महज नारों में ही संभव है। किसानों की जय केवल नेताओं के भाषण और चुनावी मौसम में गांवों की दीवारों पर चस्पा नजर आते हैं। इतने सालों में आज भी किसान का बच्चा कर्ज में ही जीता है और कर्ज में ही मर जाता है। फर्क सिर्फ इतना आया है कि पहले सेठ, महाजनों से कर्ज लेता था और आज अपनी चुनी हुई सरकार से। पहले अंग्रेज किसानों पर जुल्म ढाते थे और आज खाकी और सफेदपोश। जुल्म का तरीका बदल गया, लोग बदल गए बस नहीं बदला तो बदनसीब किसान…

किसानों को मारों नहीं उनको आगे बढ़ाओं
मध्यप्रदेश की धरती पर ऐसा दृश्त पहली बार देखने को नहीं मिला। इससे पहले मंदसौर में भी हम ऐसी तस्वीरें देख चुके हैं। अफसोस कि आज तक हम किसानों की हालत नहीं सुधार पाए। सुधारेंगे भी कैसे। उसकी हालत सुधारने के लिए लाठियां नहीं योजनाएं चाहिए होती हैं। ऐसी योजनाएं जिससे उनको अपनी फसल का उचित मूल्य मिल सके। उनको आसानी से खाद, बीज, पानी उपलब्ध हो सके। उनको अपनी फसल बेचने के लिए कई-कई दिनों तक लाइनों में खड़ा न होना पड़े। किसान अपनी फसल का खुद दाम तय तक सके। बड़े-बड़े आढ़तियां उनसे सस्ते में माल खरीदकर बाजार का लाभ न उठा सकें। चुनाव के समय किसानों का कर्ज माफ कर देने से किसान की हालत नहीं सुधरेगी। किसानों की हालत सुधरेगी बेहतर रणनीति और बड़े फैसले से।

ये कैसा राज है शिवराज
गुना की रोतीं तस्वीरें किसान हितैषी होने का दंभ भरने वाली शिवराज सरकार से पूछ रही है कि, ये कैसा राज है। ये तस्वीरें भोपाल से सटे गुना जिले की है, जहां मंगलवार को कॉलेज के लिए आवंटित जमीन को पुलिस खाली कराने पहुंची थी। किसान परिवार ने कहा कि 2 लाख रुपये लेकर इस पर बोवनी की है। इस फसल को काटने के बाद जमीन खाली कर दूंगा। लेकिन जमीन को खाली कराने पहुंचे, पुलिस के जवान और अधिकारी सुनने को तैयार नहीं थे। साथ किसानों परिवार पर पुलिस के कई जवान बेरहमी से लाठियां बरसा रहे थे।

लाठियों के एक नहीं सुनी
पुलिस गरीब किसान परिवार की बात सुनने को तैयारी नहीं थी। परिवार लात और लाठियां चला रही थी। लाचार किसान दंपति ने गुस्से में कीटनाशक पी लिया है। लेकिन अफसर इन चीजों से बेपरहवाह थे। किसान कह रहा था कि मैं कब्जेदार नहीं हूं, बटिया से जमीन ली है अब कर्ज में डूब चुका हूं। लेकिन पुलिस जमीन को खाली कराने पर अड़ी थी। कीटनाशक पीने के बाद दंपति बेहोश होकर गिर गया है। उसके बाद पुलिस वाले उन्हें जैसे-तैसे टांगकर अस्पताल ले गए।

अब एक्शन में दिख रहे हैं महाराज
घटना सामने आने के बाद राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी एक्शन में आ गए। उन्होंने कहा कि गुना की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस संबंध में मैंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से चर्चा कर के ऐसे असंवेदनशील और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का अनुरोध किया है। एक घंटे बाद ही सिंधिया ने कहा कि गुना की घटना सीएम ने एक्शन लिया है। गुना के कलेक्टर और एसपी को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना-शिवपुरी से ही लोकसभा के चुनाव लड़ते रहे हैं।

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