
बीजेपी नेता की SC में अर्जी, देश के हर नागरिकों के लिए एक समान तलाक का कानून होना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अर्जी दाखिल कर तलाक के लिए एक समान कानून के लिए दायर याचिका का विरोध किया गया है और इस मामले में दखल की गुहार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट में बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय की ओर से दाखिल अर्जी में कहा गया है कि देश के हर नागरिकों के लिए एक समान तलाक का कानून होना चाहिए। तलाक के आधार और विधान एक करने की मांग वाली याचिका में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने दखल याचिका दायर कर कहा है कि उन्हें इस मामले में दखल की इजाजत दी जाए।
सभी के लिए होना चाहिए एक नियमपर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद-13 के तहत प्रथा का जो मतलब है वह पर्सनल लॉ उससे बाहर है रूढ़ि और प्रथा और पर्सनल लॉ में फर्क है। प्रथा का जो मतलब पर्सनल लॉ उससे इतर है। सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है जिसमें तलाक के मामले में एक तरह के ग्राउंड तय करने की गुहार लगाई गई है। याचिका में अश्विनी उपाध्याय ने कहा है कि सभी नागरिकों के लिए तलाक का एक जैसा कानून होना चाहिए।
एक जैसा हो आधारचीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुवाई वाली बेंच ने 16 दिसंबर को कहा था कि हम उस गुहार पर विचार कर सकते हैं जिसमें कहा गया है कि लॉ कमिशन को कहा जाए कि वह अलग-अलग तलाक के आधार को देखे और सुझाव दे कि देश के प्रत्येक नागरिकों के लिए एक जैसा तलाक का आधार हो। याचिकाकर्ता ने कहा था कि लॉ कमिशन संविधान के अनुच्छेद-14, 15 व 21 के तहत एक तरह के तलाक के आधार को लेकर तीन महीने के भीतर सुझाव दे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा था।