लगातार 4 घंटे पति ने पीटा, फिर घर से निकाला… आज उसी बेटी ने भारत को दिलाया ऐतिहासिक गोल्ड मेडल
शर्मिला धनकड़ के लिए शॉट पुट का हर थ्रो उनके संघर्ष और दोबारा खड़ी हुई जिंदगी का वजन उठाता है। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में बेहद गरीबी में बचपन बीता। पहली शादी में भयानक घरेलू हिंसा का शिकार हुईं। यहां तक कि अपने खेल के सपने को जिंदा रखने के लिए उन्हें अपना घर तक बेचना पड़ा। लेकिन 40 साल की इस पैरा-एथलीट ने अपनी हर मुसीबत को अपनी ताकत बना लिया।
20 साल बाद भारत को दिलाया ऐतिहासिक मेडल
सोमवार रात शर्मिला ने इतिहास रच दिया। वह कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) में पैरा-एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बन गई हैं। उन्होंने महिलाओं के शॉट पुट F57 इवेंट में 9.81 मीटर का अपना सीजन का बेस्ट थ्रो फेंककर गोल्ड अपने नाम किया। इसके साथ ही गेम्स में पैरा-एथलेटिक्स मेडल के लिए भारत का 20 साल का लंबा इंतजार खत्म हो गया।
दर्दनाक अतीत, 4 घंटे तक होती रही पिटाई
शर्मिला के खेल का सफर 34 साल की उम्र में शुरू हुआ था। जब वह सिर्फ दो साल की थीं, तब उन्हें पोलियो हो गया था जिससे उनका दायां पैर प्रभावित हुआ। परिवार बहुत गरीब था। मां देख नहीं सकती थीं और पिता एक किसान थे। जिंदगी कभी आसान नहीं रही।
शर्मिला की पहली शादी 19 साल की उम्र में हुई थी, लेकिन वहां उन्हें सिर्फ प्रताड़ना मिली। अपने दर्दनाक अतीत को याद करते हुए उन्होंने बताया, 'एक रात मेरे पहले पति ने मुझे रात 11 बजे से सुबह 3 बजे तक लगातार पीटा और फिर घर से बाहर निकाल दिया। मैं अपनी दो बेटियों (15 साल की अंजू और 13 साल की लक्ष्मी) के साथ मायके लौट आई और फिर कभी वापस नहीं गई।'
दूसरे पति ने दिया शर्मिला का साथ
उनकी जिंदगी में असली बदलाव दूसरी शादी के बाद आया। उनके पति अजीत सिंह ने उन्हें पैरा स्पोर्ट्स के बारे में बताया और कोच टेक चंद व देवेंद्र के पास ट्रेनिंग लेने के लिए भेजा। 2021 में उन्होंने पैरा नेशनल चैंपियनशिप में अपने डेब्यू में ही नेशनल रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीत लिया था।
भले ही वह अच्छा प्रदर्शन कर रही थीं, लेकिन पैसों की तंगी हमेशा बनी रही। अपने खेल का खर्च उठाने के लिए इस परिवार ने 2023 में रेवाड़ी का अपना घर तक बेच दिया और किराए के मकान में रहने लगे।
शर्मिला कहती हैं, 'खेल ने मुझे दूसरा जन्म दिया है। अब इस मेडल के बाद मैं फिर से अपना घर खरीदना चाहती हूं।' मेडल जीतने के अलावा शर्मिला का सबसे बड़ा सपना अपनी दोनों बेटियों को एक बेहतरीन भविष्य देना है, ताकि उन्हें वह सब न सहना पड़े जो उनकी मां ने साहा है। आज उनकी दोनों बेटियां भी एथलेटिक्स में अपना करियर बना रही हैं।