29 March 2020
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RBI ने यूं कर दिया लोन सस्ता करने का इंतजाम

रिजर्व बैंक ने मकान और कार खरीदने पर विचार करने वालों और छोटे कारोबारियों के लिए लोन सस्ता बनाने के कदम उठाए हैं। RBI ने हाउसिंग, ऑटो सेक्टर के साथ छोटे उद्योगों को दिए जाने वाले लोन को 31 जुलाई तक CRR से मुक्त कर दिया है। इससे बैंकों के पास ज्यादा कैश बचेगा, जिससे वे इन सेक्टरों को ज्यादा लोन दे पाएंगे। इसके अलावा, लोन सस्ते भी हो सकते हैं। रिज़र्व बैंक ने पॉलिसी रीपो रेट को जस का तस रहने दिया लेकिन उसके इस उपाय से कॉस्ट ऑफ फंड में कमी आ सकती है।

ज्यादा लोन दे सकेंगे बैंक
देश के सबसे बड़े लेंडर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा, ‘कुछ खास तरह के रिटेल लोन सेगमेंट में नया कर्ज बांटने के लिए बैंकों को RBI के पास CRR रखने की जरूरत नहीं रहने से कॉस्ट ऑफ फंड में भी कमी आएगी।’ अभी बैंकों को CRR के तौर पर आरबीआई के पास डिपॉजिट यानी नेट डिमांड एंड टाइम लायबिलिटीज (NDTL) के 4% के बराबर की रकम रखनी पड़ती है। इससे बैंकों के पास लोन बांटने के लिए कम रिसोर्स रह जाते हैं, इसलिए गुरुवार को उठाए गए कदम से बैंकों को लोन बांटने के लिए बढ़ावा मिलेगा। यह बात बैंक ऑफ इंडिया के सीईओ ए के दास ने कही।

58 साल के लो पर लोन ग्रोथ
FY2020 में बैंकों की लोन ग्रोथ के 58 साल के निचले स्तर पर आ जाने के आसार हैं। रिजर्व बैंक ने गुरुवार को कहा कि कमर्शल बैंकों को गाड़ियों और रिहायशी मकानों के अलावा माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) के वास्ते दिए जाने वाले लोन के बराबर रकम CRR मेन्टिनेंस के लिए NDTL से काटने की इजाजत होगी। यह व्यवस्था 31 जनवरी 2020 को खत्म पखवाड़े से 31 जुलाई तक लागू रहेगी। आरबीआई के हालिया डेटा के मुताबिक, दिसंबर अंत तक बैंकों के ग्रॉस लोन में होम लोन, वीइकल लोन और MSME लोन का हिस्सा 22.4% था।

ब्याज भी घटेगा?
आनंद राठी ग्रुप के चीफ इकनॉमिस्ट सुजान हाजरा ने कहा, ‘कुछ कैटिगरी के लोन के लिए CRR रखने की जरूरत खत्म किए जाने से ऐसे लोन पर लगने वाले ब्याज की दरों में मामूली कमी आ सकती है और इससे बैंकों की नेट इंटरेस्ट इनकम में कुछ समय के लिए सुधार आ सकता है।’ बैंक कॉस्ट में होनेवाली बचत का लाभ कस्टमर्स को दे सकते हैं। रेटिंग फर्म इकरा के वाइस प्रेसिडेंट कार्तिक श्रीनिवासन ने कहा, ‘अगर मान लें इन सेक्टर की लोन ग्रोथ 15-16% रहती है तो ग्रॉस बैंक लोन में इन सेक्टर्स का 22-24% शेयर होता है तो सेक्टर लेवल पर अगले छह महीनों में लगभग 8000 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।’

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